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Showing posts from October, 2020

पल भर के सुख के लिए क्यो चोर बनु मैं उम्र भर के लिए

ये अजीब बात है । एक सपने के पीछे सैकड़ो जले हुये सपनों कि राख हैं। और ये सपना उस पेड़ कि तरह है ।जिसकी साखाओ को माली ने ही काटा है । बहुत ऊँची हो गई है । उसकी एक शाखा जिसे आगे बढने के लिए छोड़ा था माली ने ही शायद माली बहुत खुश हैं । उस एक शाखा को देख कर पर माली कब समझ पाया है पेड़ के उस दर्द को और शायद कभी नही

जब से तुम चले गए हो जिन्दगी से मेरी कई साल कम हो गए हैं जिन्दगी से मेरी

में मिलता। नहीं हूं अक्सर उन लोगो से भी जो मिलते हैं तुमसे कभी फिर तुम्हारे अक्स को भूलाना मुस्किल होता है

अब दफ़नायगे तुम्हारी यादों को यु तो हम जी हि नहीं पायेंगे

किस मोड़ पर खड़े हो तुम ढूंढते हुये तुम्हें आ रहे है कंही मौत हमसफर तुमसे से पहले किसी मोड़ पर न मिल जाये

जिंदा है तेरी यादों की वजह से जो सांसों की जगह चलती हैं मरे नहीं है अभी तक आखरी ख्वाइस जो तुम हो

dolat

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रेगिस्तान

 सुखे हुए रेगिस्तान मे बहुत प्यासा हू मैं  यु याद आकरके मेरी प्यास बढ़ाया ना करो तुम 

दौलत स्योरहत नाम तीनो दुश्मन है मेरे इन तीनों ने मिलकर मेरे इश्क़ का गला दबा दिया

उनकी आँखों में मैने बड़ी गौर से देखा है उनमें हमेशा इश्क़ इक़बाल था पर न जाने क्यू उम्र भर झूठ बोलते रहे वो

वो आ कर मेरे सपनो मे। मुस्करा रहे थे आबाद मेरी जींदगी मे आग रहे थे एक तुम्हे छोड़ कर सब कुछ है मेरे पास