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जिस्म से था ना खूबसूरती से मुझे प्यार था तुम्हारी रुह से

फूलों से भी नाजुक है दिल का रिस्ता दिलो से भी नाजुक है प्यार का रिस्ता प्यार से भी नाजुक है खून का रिस्ता खून से भी नाजक है रूह का रिस्ता जो सिर्फ़ तुमसे से है

हम दुःखी क्यों होते हैं --- हम दुःखी इसलिए होते हैं क्योंकि स्वयं विचारों पर हमारा नियंत्रण नहीं है हम क्या सोंचते है क्या करते हैं क्या बोलते हैं यंहा तक क्या खाते हैं क्या प्रतिक्रिया दे रहे हैं हमे इनका कोई ज्ञान नहीं है बिलकुल बिना लगाम के घोड़े की तरह यदि हम थोड़ा सा भी ध्यान अपने विचारों पर दे ना शुरु करेंगे हम आत्म नियंत्रित होना शुरू हो जाते हैं फिर वही पायेगे जो जो विचार करेंगे लेकिन विचारों पर पुर्ण नियंत्रण अति आवश्यक है बिल्कुल वैसे हि जैसे कार का हैंडल नियंत्रण कर आप सफर का जीतना चाहे मजा लो

विचार एक बीज हुआ पोषण मिला मेहनत का विचार एक पौध हुआ पोषण मिला चिन्तन और विवेक का विचार एक वट व्रक्ष हुआ पोषण मिला धैर्य का विचार एक फल हुआ पोषण मिला ध्यान का

सफलता

सफलता    जीवन होता है संग्राम  शूल  बिछे होते है पग पग पर  और पथ पर अंगारे भी  पहाड़ बनकर टूटती मुश्किलें  ओर आकर्षण का तूफान  होती है नाजुक उमरिया रखना होता है  इसका भी ध्यान  बघनख छिपे होते है लोगो के मुख मे  और तालु मे तलवारे  तलवारो से बचना होता है  लगा के अपनी जान  साधना होता है जीवन  ईसा भी लेता  ईम् तिहान्  पल पल मे होती है परीक्षा  नही होता है विश्राम  लक्ष्य होता है जीवन का सर्वस्व  और आगे की पहचान  होता है राही अकेला और  पथ भी अंजान  आदर्श भी ऊँचे होते है  ऊँची होती है मंजिले  मन बार बार बदलता है आती है पुकार एक बार जो सुन ले मन की पुकार  वही खोलता है सफलता के द्वार       शिव कुमार सापूनिया   Raisinghnagar 335051