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मैं ये भी नही चाहता की मेरे दिल से कोई आह निकले और तुम तक पहुँचे

इन्सान कितना मस्त आपनी सुख सुविधाये बढ़ाने में खुद को भुलाकर ओर आपनी मौत को भुलाकर जैसे सब कुछ ऐसे ही बना रहेगा

इतनी तो दुआ तुम भी करो की आओ ना कभी मेरे सामने एक तेरा एहसास ही काफी है मुझे सताने के लिये

परखनली मे मानव चांद पर बस्ती जीवों का क्लोन लैब मे जैसा चाहो वैसा बीज मंगल पर रोज लैंडिंग आसमान में उडान बस मुर्दे मे साँस बाकी है मेरे खुदा तेरे बजूद को भी लालकरें गा इन्सान