ये अजीब बात है । एक सपने के पीछे सैकड़ो जले हुये सपनों कि राख हैं। और ये सपना उस पेड़ कि तरह है ।जिसकी साखाओ को माली ने ही काटा है । बहुत ऊँची हो गई है । उसकी एक शाखा जिसे आगे बढने के लिए छोड़ा था माली ने ही शायद माली बहुत खुश हैं । उस एक शाखा को देख कर पर माली कब समझ पाया है पेड़ के उस दर्द को और शायद कभी नही

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